NewsShot.in | April 3, 2026 | 10:55 PM IST | New Delhi
दुनिया का कारोबार समुद्र पर टिका है, ये कहना गलत नहीं होगा। अभी देखिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में थोड़ी रूकावट क्या आई पूरी दुनिया में त्राहिमाम मच गया। क्या आपको पता है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे दुनिया में कितने महत्वपूर्ण स्ट्रेट्स हैं? अगर इनमें बाधा आ जाए तो हमारी जिंदगी रूक जाएगी। पूरी दुनिया बर्बाद हो जाएगी। ग्लोबल इकोनॉमी तहत-नहस हो जाएगी। क्योंकि 70-80 फीसदी सामान समुद्र के इन्हीं रास्तों से होकर गुजरता है। तेल, गैस और दवाइयों से लेकर रोजमर्रा की छोटी-बड़ी अधिकांश वस्तुएं इन्हीं समुद्री मार्गों से आती-जाती हैं।
इन समुद्री मार्गों को समुद्री चोक प्वॉइंट्स (Maritime Chokepoints) कहते हैं। ये बहुत संकरे समुद्री गलियारें हैं। इनमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से पूरी दुनिया की सप्लाईचेन टूटती है और अर्थव्यवस्था हिल जाती है।
इसी साल यानि 2026 में जो चोक प्वॉइंट सबसे ज्यादा चर्चा में है वो है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। ईरान युद्ध के कारण इसे कभी आंशिक, कभी पूरी तरह से बंद कर रहा है। फिलहाल ईरान यहां टोल भी वसूलने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉकेड की वजह से पूरी दुनिया तेल और गैस संकट से जूझ रही है
समुद्र रास्तों में ऐसे कई चोक प्वॉइंट्स हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अलावा प्रमुख हैं स्ट्रेट ऑफ मलक्का, स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर, बॉब अल मंदेब स्ट्रेट, स्वेज कैनाल और पनामा कैनाल। इन सभी को कहते हैं समुद्री धमनियां।
स्ट्रेट ऑफ मलक्का में पाइरेसी यानी चोरी के रिकॉर्ड मामले इस साल सामने आए हैं। जिब्राल्टर पर ब्रिटेन और ईयू का नया समझौता बॉर्डर खोलने जा रहा है। बॉब अल मंदेब पर यमन के हूती हमले करते रहते हैं इसलिए ये समुद्री मार्ग डिस्टर्ब चल रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान युद्ध के कारण लगभग बंद है।
इस लेख में आपको इन प्रमुख समुद्री धमनियों जिनमें शामिल हैं होर्मुज, जिब्राल्टर, मलक्का, बॉब अल मंदेब, स्वेज और पनामा कैनाल के बारे में विस्तार से जानकारी मिलेगी। इन समुद्री रास्तों से होकर कितने जहाज गुजरते हैं, कितना कारोबार होता है, कितने महत्वपूर्ण हैं ये रास्ते, ये सारी जानकारी इस लेख में मिलेगी।

1. जिब्राल्टर स्ट्रेट: ब्रिटेन का “रॉक”, यूरोप का गेटवे
जिब्राल्टर स्ट्रेट (Strait of Gibraltar) स्पेन और मोरक्को के बीच है। ये दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण स्ट्रेट है। भूमध्य सागर को अटलांटिक महासागर से जोड़ता है। इसे “Pillars of Hercules” भी कहते हैं। ये स्ट्रेट सिर्फ 14 किमी चौड़ा है, लेकिन यहां से हर साल एक लाख से अधिक समुद्री जहाज गुजरते हैं। पूरे वैश्विक समुद्री व्यापार का करीब 10 फीसदी से अधिक इसी रूट से होता है। जिब्राल्टर स्ट्रेट बंकरिंग यानि कि समुद्री जहाजों में ईंधन भरने का सबसे बड़ा हब भी है।
समुद्री जहाजों की आवाजाही के लिए जिब्राल्टर स्ट्रेट UNCLOS कानून (The United Nations Convention on the Law of the Sea) के तहत पूरी तरह फ्री है। यहां कोई ट्रांजिट टोल नहीं। ये स्ट्रेट सबसे अधिक सुरक्षित भी है। इस इलाके में जिओपॉलिटल टेंशन भी नहीं है।

2.होर्मुज स्ट्रेट: दुनिया का सबसे बड़ा एनर्जी चोक प्वॉइंट
Strait of Hormuz आजकल खूब चर्चा में है। ये पर्सियन गल्फ से गल्फ ऑफ ओमान तक फैला है। मतलब ईरान और ओमान के बीच में है। इसकी चौड़ाई 39 किमी है, और यहां 3-4 नेविगेशन लेन हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि यहां से हर रोज करीब 21 मिलियन बैरल तेल यानि कि दुनिया का 20-25% तेल, और दुनिया की करीब 20% LNG इसी से होकर गुजरता है। एशिया के बड़े देश चीन, भारत और जापान अपनी तेल और गैस जरूरतों के लिए 80-85% इसी पर निर्भर हैं।
UNCLOS कानून के मुताबिक यहां पर भी ट्रांजिट फ्री है लेकिन फिलहाल ईरान ने इस पर टोल लगा दिया है। ईरान में अभी युद्ध चल रहा है। इसी के चलते ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अपने कब्जे में लेकर ब्लॉकेड लगा दिया। इस वजह से यहां हजारों जहाज फंस गए हैं, ट्रैफिक 90% गिर गया है। ईरान सिर्फ मित्र देशों के जहाजों को ही यहां से गुजरने दे रहा है बाकी सभी पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। ईरान के इस कदम से दुनिया भर में तेल संकट पैदा हो गया है और वैश्विक मंदी की आशंका बन रही है।

3.मलक्का स्ट्रेट: सबसे बिजी, पाइरेसी का खतरा
इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के बीच में स्थित है Strait of Malacca । ये हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है। ये सबसे संकरा है, लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण और बिजी समुद्री मार्ग है। ये 2 से 3 किमी ही चौड़ा है।
मलल्का स्ट्रेट से एक लाख से अधिक जहाज हर साल गुजरते हैं। करीब 24 मिलियन बैरल तेल प्रतिदिन इस स्ट्रेट से ले जाया जाता है। पूरे वैश्विक समुद्री व्यापार का करीब 25-30%, माल यहीं से गुजरता है। चीन का 80% तेल इसी रूट से आता है। जहाजों की आवाजाही पर यहां भी कोई टोल या ट्रांजिट फीस नहीं लगती है। लेकिन यहां पाइरेसी (चोरी) का खतरा सबसे ज्यादा है। 2025 की ReCAAP ISC की रिपोर्ट के अनुसार, SOMS (मलक्का और सिंगापुर) में चोरी की 108 घटनाएं हुईं। 2024 के मुकाबले 74% बढ़ीं हैं। इनमें ज्यादातर बिना हथियार के चोरी (स्टोर्स, स्पेयर्स, फ्यूल) की घटनाएं हैं। इनमें क्रू को कोई चोट नहीं पहुंचाई गई।
दरअसल ये मार्ग बहुत ही संकरा है, जहाज धीमें चलते हैं। कोस्टल इलाके के लोग जिनमें ज्यादातर इण्डोनेशिया के हैं, इन वारदातों में शामिल हैं। कई Organized Syndicates भी सक्रिय हैं।
4.स्वेज कैनाल (The Suez Canal)
Suez Canal मिस्र में है। रेड सी को भूमध्य सागर से जोड़ने वाली कैनाल है। ये प्राकृतिक नहीं है बल्कि बनाई गई है। स्वेज बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां से ग्लोबल ट्रेड का करीब 12-15 फीसदी कारोबार होता है। यहां पर टोल लगता है। क्योंकि स्ट्रेट प्राकृतिक होते हैं और कैनाल इंसान के बनाए। इसलिए यहां पर UNCLOS कानून लागू नहीं होता है। इजिप्ट (मिश्र) की कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा स्वेज कैनाल के टोल से ही आता है।
स्वेज नहर की लंबाई 193.30 किमी (120.11 मील), चौड़ाई 205-225 मीटर और गहराई लगभग 24 मीटर है। इसका उद्घाटन 17 नवंबर 1869 हुआ। स्वेज कैनाल ने यूरोप और एशिया के बीच की दूरी को करीब 6000 मील कम कर दिया वरना अफ्रीका के नीचे से जहाज आते-जाते थे। स्वेज कैनाल दुनिया के सबसे बिजी समुद्री मार्गों में से एक है।
5.बाब एल-मंदेब स्ट्रेट (Strait of Bab al-Mandab)
Bab al-Mandab Strait रेड सी का एंट्री प्वॉइंट है। यहां से करीब 8 मिलियन बैरल तेल की आवाजाही होती है। स्वेज कैनाल जो रेड सी को मूमध्य सागर से जोड़ती है, उस कैनाल से माल ले जाने के लिए एशियाई और यूरोपीय देशों को बाब अल मंदेब से ही होकर गुजरना पड़ता है। इसलिए ये स्ट्रेट बहुत ही महत्वपूर्ण है।
ईरान ने अपने हूती समर्थकों के बल पर इसे भी बंद करने की धमकी दी है। हूती यमन के विद्रोही हैं जिनको ईरान समर्थन देता है। हूतियों का यमन के बहुत बड़े हिस्से पर कब्जा है और उन्हीं का शासन चलता है। इस स्ट्रेट के बंद होने से जहाजों को दक्षिण अफ्रीका के Cape of Good Hope से घूमकर जाना पड़ता है।
6.पनामा कैनाल (Panama Canal)
Panama Canal मानव निर्मित कैनाल है। अमेरिका महाद्वीप के मध्य में है। अटलांटिक महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है। इससे ग्लोबल ट्रेड के लिए काफी छोटा रास्ता मिल गया। पनामा कैनाल लगभग 77 किमी (48 मील) लंबी है। जब ये कैनाल नहीं थी तो अटलांटिक महासागर से प्रशांत महासागर आने-जाने के लिए जहाजों को दक्षिण अमेरिका के Cape Horn से घूमना पड़ता था।
पनामा कैनाल से वैश्विक कारोबार में करीब 5 फीसदी का योगदान है। यहां से तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स लगभग 2 से 3 मिलियन बैरल प्रति दिन गुजरते हैं। LNG और LPG का ट्रैफिक भी काफी बड़ी तादाद में निकलता है। अमेरिका को इसका सबसे ज्यादा फायदा होता है।
इस मार्ग पर ट्रांजिट फ्री नहीं है। यहां टोल लगता है। कैनाल पर पनामा देश का अधिकार है और उसकी अर्थव्यवस्था को इस कैनाल से हुई कमाई से बड़ी मजबूती मिलती है। इस मार्ग पर जलवायु परिवर्तन का असर पड़ रहा है। सूखे की मार पर इस पर पड़ती है जिससे जहाजों की आवाजाही बाधित होती है।
इन स्ट्रेट्स की तुलना करें तो सबसे बिजी है मलक्का स्ट्रेट। फिलहाल सबसे ज्यादा असुरक्षित है होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल मंदेब स्ट्रेट। जबकि जिब्राल्टर स्ट्रेट है सबसे सुरक्षित।
भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा
भारत पर्सियन गल्फ यानि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से करीब 60 फीसदी तेल आयात करता है। इसलिए देश की एनर्जी सिक्यूरिटी के लिए ये हालात ठीक नहीं हैं। हालांकि अब सबसे ज्यादा रूस से आ रहा है। मलक्का स्ट्रेट पाइरेसी से सप्लाई चेन प्रभावित करता है। जिब्राल्टर में कोई समस्या नहीं है इसलिए यूरोप से ट्रेड में परेशानी नहीं है।
दुनिया की अर्थव्यवस्था ठीक से चलती रहे इसके लिए जरूरी है कि इन चोक प्वॉइंट्स से समुद्री जहाजों की आवाजाही किसी प्रकार से भी बाधित न हो। क्योंकि ये हैं वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़। ये धमनियां ही दुनिया को चलाती हैं।
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