रोल्स-रॉयस का भारत विस्तार: लड़ाकू विमान इंजन और 10,000 नौकरियों का वादा

ब्रिटेन की एयरोस्पेस कंपनी रोल्स-रॉयस ने भारत में बड़े विस्तार की घोषणा की है। एएमसीए लड़ाकू विमान के लिए 120 kN इंजन प्रस्ताव, पूरी तकनीक हस्तांतरण और 10,000 नई नौकरियों के साथ यह कदम आत्मनिर्भर भारत और इंडिया-यूके विज़न 2030 को मजबूत करेगा।

भारत की रक्षा और एयरोस्पेस इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी खबर आई है। ब्रिटेन की मशहूर एयरोस्पेस कंपनी रोल्स-रॉयस ने भारत में बड़े पैमाने पर विस्तार की घोषणा की है। कंपनी ने भारत को एएमसीए (Advanced Medium Combat Aircraft) कार्यक्रम के लिए 120 किलो न्यूटन क्षमता वाला लड़ाकू विमान इंजन बनाने का प्रस्ताव दिया है। सबसे खास बात यह है कि इस इंजन के लिए भारत को पूरी तकनीक और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) दिए जाएंगे।

पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ा भरोसा

रोल्स-रॉयस के सीईओ तुफान एरगिनबिलजिक ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक में रक्षा, एयरोस्पेस और ऊर्जा क्षेत्र में गहरी साझेदारी पर चर्चा हुई। इसके बाद कंपनी ने भारत को एक रणनीतिक निर्माण और तकनीकी केंद्र बनाने की योजना को सार्वजनिक किया। यह कदम भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

रोल्स-रॉयस का भारत विस्तार: लड़ाकू विमान इंजन और 10,000 नौकरियों का वादा
रोल्स-रॉयस का भारत विस्तार: लड़ाकू विमान इंजन और 10,000 नौकरियों का वादा

एएमसीए इंजन प्रस्ताव

भारत का एएमसीए प्रोजेक्ट अगली पीढ़ी का स्टेल्थ लड़ाकू विमान है। रोल्स-रॉयस ने इसके लिए 120 किलो न्यूटन क्षमता वाला इंजन बनाने का प्रस्ताव दिया है। कंपनी ने वादा किया है कि भारत को इस इंजन पर पूर्ण तकनीकी अधिकार मिलेंगे। इसका मतलब है कि भारत भविष्य में इस इंजन को खुद डिजाइन, अपग्रेड और निर्यात कर सकेगा। इसके लिए भारत में डिजाइन, विकास और निर्माण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इससे भारत को उन्नत प्रोपल्शन सिस्टम में आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा।

10,000 नई नौकरियां

रोल्स-रॉयस ने भारत में 10,000 नई नौकरियां देने का वादा किया है। ये नौकरियां खास तौर पर उच्च कौशल वाले क्षेत्रों में होंगी, जैसे – एयरोस्पेस डिजाइन, डिजिटल इंजीनियरिंग, मटेरियल साइंस और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग। कंपनी भारतीय सप्लायरों से खरीद को दस गुना बढ़ाने की योजना बना रही है। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) को बड़ा फायदा मिलेगा और भारत वैश्विक एयरोस्पेस सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभा सकेगा।

आत्मनिर्भर भारत और विज़न 2030 से जुड़ाव

यह प्रस्ताव सीधे तौर पर भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर होना चाहिए। रोल्स-रॉयस का यह कदम उसी दिशा में एक बड़ा योगदान है। साथ ही यह पहल इंडिया-यूके विज़न 2030 रोडमैप से भी मेल खाती है, जिसका मकसद रक्षा, व्यापार, नवाचार और तकनीक में सहयोग बढ़ाना है।

भारत में रोल्स-रॉयस की मौजूदगी

फिलहाल भारत की सेना के कई प्लेटफॉर्म पर पहले से ही 1,400 से अधिक रोल्स-रॉयस इंजन काम कर रहे हैं। इनमें जगुआर लड़ाकू विमान, हॉक ट्रेनर जेट, अर्जुन टैंक और नौसेना के जहाज शामिल हैं। यह लंबा अनुभव भारत और रोल्स-रॉयस की साझेदारी को और मजबूत बनाता है।

रोल्स-रॉयस का भारत विस्तार: लड़ाकू विमान इंजन और 10,000 नौकरियों का वादा
रोल्स-रॉयस का भारत विस्तार: लड़ाकू विमान इंजन और 10,000 नौकरियों का वादा

रणनीतिक महत्व

रोल्स-रॉयस का यह प्रस्ताव भारत को रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। इंजन तकनीक अब तक भारत के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है। अगर यह साझेदारी सफल होती है तो भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकेगा बल्कि भविष्य में इंजन और उसके पुर्जों का निर्यात भी कर पाएगा। यह कदम भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।

यह खबर भारत की रक्षा और एयरोस्पेस इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम है। रोल्स-रॉयस का भरोसा और भारत को दी जाने वाली पूरी तकनीक इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में भारत रक्षा उत्पादन में दुनिया की अग्रणी ताकतों में शामिल हो सकता है।

Top News: यूजीसी के नए नियम 2026: उच्च शिक्षा में समानता की ओर ऐतिहासिक कदम

Leave a Comment