भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे से 75% भारतीय कृषि निर्यात पर शून्य टैरिफ, $1.36 अरब के उत्पादों को लाभ, किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद।

भारत और अमेरिका के बीच बने नए अंतरिम व्यापार ढांचे ने भारतीय कृषि निर्यात को बड़ी राहत दी है। इस समझौते के तहत अब अमेरिका जाने वाले भारत के 75 प्रतिशत कृषि निर्यात पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। इससे लगभग 1.36 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद सीधे लाभान्वित होंगे।
State Bank of India की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम भारत के मौजूदा 1.3 अरब डॉलर के कृषि व्यापार अधिशेष को और मजबूत करेगा। भारत हर वर्ष अमेरिका को लगभग 3.4 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद निर्यात करता है, जबकि आयात करीब 2.1 अरब डॉलर का है।
समझौते की पृष्ठभूमि
6 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच बातचीत के बाद यह अंतरिम ढांचा सामने आया।
इस समझौते के तहत:
- कुछ भारतीय उत्पादों पर लगने वाला शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया
- 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क हटाया गया
- भारत ने कुछ अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर शुल्क घटाने पर सहमति दी
- गेहूं, चावल, डेयरी और पोल्ट्री जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षा दी गई
मार्च 2026 में इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिसके बाद व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ सकती है।
किन उत्पादों को होगा सबसे ज्यादा फायदा
चावल
अमेरिका के कुल चावल आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। शून्य टैरिफ से भारतीय चावल की प्रतिस्पर्धा और मजबूत होगी।
मसाले, चाय और कॉफी
अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी करीब 3 प्रतिशत है, लेकिन असम, केरल और कर्नाटक के बागान क्षेत्रों को नई मांग मिल सकती है।
मत्स्य क्षेत्र
पहले भारतीय समुद्री उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगता था, जो अब घटकर 18 प्रतिशत रह गया है। आंध्र प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु के निर्यातकों को इससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
अन्य उत्पाद
काजू, तिल, फल और सब्जियां, जूस और जैम जैसे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ तथा तेल बीज भी इस समझौते से लाभान्वित होंगे।
आर्थिक प्रभाव और ग्रामीण आय
कृषि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। लाखों किसान और कृषि मजदूर निर्यात बाजार पर निर्भर हैं। अमेरिकी बाजार में शून्य टैरिफ मिलने से:
- निर्यात की मात्रा बढ़ सकती है
- किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है
- ग्रामीण आय में स्थिरता आ सकती है
एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह अंतरिम ढांचा आगे चलकर पूर्ण व्यापार समझौते में बदलता है, तो अमेरिका के साथ भारत का कुल व्यापार अधिशेष 90 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय कृषि निर्यात को दीर्घकालिक स्थिर बाजार मिलेगा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
आगे की रणनीति
मार्च 2026 के बाद दोनों देश निम्न मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं:
- शून्य टैरिफ वाली श्रेणियों का विस्तार
- गैर-शुल्क बाधाओं को कम करना
- आपूर्ति श्रृंखला सहयोग बढ़ाना
- लॉजिस्टिक और गुणवत्ता मानकों को आसान बनाना
यह समझौता केवल व्यापारिक कदम नहीं है, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों को भी नई मजबूती देता है। बदलते वैश्विक व्यापार माहौल में यह भारतीय कृषि निर्यात के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
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