नई दिल्ली, 24 दिसंबर, 2025, समय: 12:55 PM IST – दुनियाभर में मची उथल-पुथल के बावजूद भारत में सोने और चांदी की कीमतें हर रोज नए रिकॉर्ड बना रही हैं। इस सप्ताह भारत में सोने और चांदी की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गईं। इसका बड़ा कारण वैश्विक अस्थिरता, तनाव, और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और कटौती की उम्मीदों के बीच वैश्विक निवेशकों का सुरक्षित-ठिकाना तलाशना है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, भारत में 24-कैरेट सोने की कीमतें 10 ग्राम के लिए 1,38,000 रुपये से ऊपर पहुंच गईं। कुछ रिटेल बाजारों में कीमतें 1,40,850 रुपये के करीब तक पहुंच गई हैं। जबकि चांदी 2,23,000 रुपये प्रति किलोग्राम को पार कर गई है। सोने और चांदी के ये रेट अब तक के नए रिकॉर्ड हैं।
क्या हैं वैश्विक कारक
24 दिसंबर को स्पॉट सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस से ऊपर चढ़ गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है, जबकि चांदी 72.70 डॉलर प्रति औंस और प्लैटिनम 2,377.50 डॉलर पर पहुंच गया।
बाजार के विश्लेषक इस मजबूती का श्रेय वैश्विक जोखिमों को दे रहे हैं। इनमें अमेरिका-वेनेजुएला तनाव में वृद्धि, रूस-यूक्रेन संघर्ष और धीमी वैश्विक ग्रोथ को लेकर निवेशकों की बढ़ती चिंताएं शामिल हैं।
विश्लेषक कहते हैं कि वैश्विक हालातों को देखते हुए राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है। इस वैश्विक संकट ने निवेशकों को “सुरक्षित-ठिकाना” ढूढ़ने पर मजबूर कर दिया है।
दिसंबर में फेडरल रिज़र्व द्वारा लगातार तीसरी बार 25-बेसिस-पॉइंट की दर में कटौती से फेडरल फंड्स दर घटकर 3.5–3.75% हो गई, जिससे सोने और चांदी जैसी बिना रिटर्न वाली संपत्तियों की मांग और बढ़ गई। ट्रेडर 2026 में और कटौती की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई स्थिर हो रही है और विकास धीमा हो रहा है।
इसतरह का मौद्रिक माहौल और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता मिलकर, कीमती धातुओं के लिए एकदम सही माहौल बना रही हैं। वैश्विक केंद्रीय बैंक भी अपने भंडार में विविधता ला रहे हैं। फिएट मुद्राओं में घटते विश्वास के बीच सोने की होल्डिंग बढ़ा रहे हैं।
चांदी ने 150% वार्षिक लाभ के साथ सोने को पीछे छोड़ा
2025 में चांदी ने सोने से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। साल-दर-साल लगभग 150% की बढ़ोतरी हुई है। 1979 के बाद से यह इसकी सबसे मजबूत सालाना रैली है। जबकि सोने में 70% की वृद्धि हुई है। विश्लेषक चांदी की रैली के पीछे सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे औद्योगिक क्षेत्रों से बढ़ती मांग को प्रमुख कारण बता रहे हैं।
भारत में मुद्रा में उतार-चढ़ाव ने घरेलू कीमतों में वृद्धि को बढ़ा दिया है। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले में करीब 91.07 पर पहुंच गया और फिर स्थिर हो गया।
बाजार रणनीतिकारों का अनुमान है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहते हैं, तो सोना अगले छह से बारह महीनों में $5,000 प्रति औंस और चांदी $80 तक पहुंच सकती है।
जैसे-जैसे साल 2025 समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, निवेशक वैश्विक अनिश्चितता से बचने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।