नई दिल्ली, 26 दिसम्बर 2025, समय 01:11 PM IST-क्रिसमस डे पर रूस ने यूरोपीय संघ और NATO के साथ गैर-आक्रामण संधि (Non-Aggression Pact) का प्रस्ताव रखा। रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी दस्तावेज़ बनाया जा सकता है। वहीं यूक्रेन ने 20-सूत्रीय संशोधित शांति योजना पेश की है, जबकि पश्चिमी देशों ने रूस की ईमानदारी पर संदेह जताया है।
यूक्रेन-रूस शांति वार्ता की दिशा में इसे एकबड़ा कूटनीतिक प्रस्ताव माना जा रहा है। ये प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन-रूस युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिकी वार्ताकारों और यूरोपीय संघ ने प्रयास तेज कर दिए हैं।
रूस का प्रस्ताव और उद्देश्य
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा कि रूस इस संधि को एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ के रूप में तैयार करना चाहता है। इसका उद्देश्य ये दिखाना है कि रूस NATO देशों पर हमला करने की कोई योजना नहीं बना रहा है।
वार्ता की वर्तमान स्थिति
मियामी में रूस के मुख्य वार्ताकार किरिल दिमित्रिएव ने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ़ और जारेड कुश्नर से मुलाकात की। ज़खारोवा ने कहा कि अमेरिका के साथ वार्ता में “धीमी लेकिन स्थिर प्रगति” हो रही है, जबकि यूरोपीय देशों पर प्रगति को बाधित करने का आरोप लगाया। इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने 20 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को संशोधित करके पेश किया है। इसमें रूस से गैर-आक्रामण (Non-Aggression Pact) को कानून में दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही, यूक्रेन को NATO जैसी सुरक्षा गारंटी और 8 लाख सैनिकों की सेना बनाए रखने का प्रावधान भी शामिल है।
हालांकि पश्चिमी देशों ने रूस की इस पहल पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि रूस का सुरक्षा समझौतों को तोड़ने का इतिहास है और फरवरी 2022 से यूक्रेन पर रूस के आक्रमण जारी हैं। इसलिए यह प्रस्ताव केवल कूटनीतिक रणनीति हो सकता है, वास्तविक शांति का संकेत नहीं।
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