सुभाष चंद्रा को NCLT से राहत, ₹22,006 करोड़ का लोन मात्र 6.5 करोड़ में सेटल

₹22,006 करोड़ के दावे के मुकाबले सिर्फ ₹6.5 करोड़! NCLT ने सुभाष चंद्रा की भुगतान योजना को दी मंजूरी। लेनदारों को मिलेगा सिर्फ करीब 0.03% पैसा, 99.97% का हेयरकट; HDFC बैंक और LIC Housing Finance NCLAT जाने की तैयारी में

Newsshot.in | नई दिल्ली | 28 अगस्त 2026

इस खबर की 5 बड़ी बातें

  • NCLT ने जी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया में भुगतान योजना को मंजूरी दे दी है।
  • करीब ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत दावों के मुकाबले योजना में कुल ₹6.5 करोड़ का भुगतान प्रस्तावित है।
  • इनमें ₹6.25 करोड़ लेनदारों को और ₹25 लाख दिवालिया प्रक्रिया की लागत के लिए रखे गए हैं।
  • इसका मतलब है कि लेनदारों को उनके स्वीकृत दावों का करीब 0.03% ही वापस मिलेगा, यानी लगभग 99.97% का हेयरकट
  • HDFC बैंक और LIC Housing Finance समेत कुछ लेनदार इस फैसले को चुनौती देने के लिए NCLAT जाने की तैयारी कर रहे हैं।

सुभाष चंद्रा का क्या है पूरा मामला?

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने जी ग्रुप के संस्थापक और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया में उनकी प्रस्तावित भुगतान योजना को मंजूरी दे दी है।

इस मामले में लेनदारों के कुल स्वीकृत दावे करीब ₹22,006.57 करोड़ हैं। लेकिन मंजूर योजना के तहत लेनदारों को सिर्फ ₹6.25 करोड़ मिलेंगे। इसके अलावा ₹25 लाख दिवालिया प्रक्रिया से जुड़े खर्च के लिए निर्धारित किए गए हैं।

इस गणित के अनुसार लेनदारों की वसूली लगभग 0.03% होगी और करीब 99.97% राशि का हेयरकट सहना पड़ेगा।

Subhash Chandra को NCLT से राहत, ₹22,006 करोड़ का लोन मात्र 6.5 करोड़ में सेटल
Subhash Chandra को NCLT से राहत, ₹22,006 करोड़ का लोन मात्र 6.5 करोड़ में सेटल

TOP FACTS

₹22,006.57 करोड़ स्वीकृत दावे
₹6.25 करोड़ लेनदारों को भुगतान
₹25 लाख प्रक्रिया लागत
लगभग 99.97% → हेयरकट

मामला यहां तक कैसे पहुंचा?

इस मामले की शुरुआत एक ऐसे कर्ज से हुई जिसके लिए सुभाष चंद्रा ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

वर्ष 2010 में चंद्रा ने विवेक इंफ्राकॉन के करीब ₹170 करोड़ के कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी। बाद में यह कर्ज डिफॉल्ट हो गया। इसके बाद इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस ने 2022 में चंद्रा के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए NCLT का रुख किया। कंपनी का नाम बाद में Sammaan Capital हो गया।

अप्रैल 2024 में सुभाष चंद्रा के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया शुरू हुई।

मामले की सुनवाई के दौरान NCLT की दो सदस्यीय पीठ में योजना को लेकर मतभेद सामने आया। इसके बाद मामला तीसरे सदस्य निलेश शर्मा के पास गया। उन्होंने मंगलवार को योजना को मंजूरी दे दी।

Subhash Chandra को NCLT से राहत, ₹22,006 करोड़ का लोन मात्र 6.5 करोड़ में सेटल
Subhash Chandra को NCLT से राहत, ₹22,006 करोड़ का लोन मात्र 6.5 करोड़ में सेटल

₹6.5 करोड़ का भुगतान कैसे होगा?

NCLT के सामने रखी गई योजना के मुताबिक कुल ₹6.5 करोड़ में से:

₹6.25 करोड़ – लेनदारों में उनके स्वीकृत दावों के अनुपात में बांटे जाएंगे।

₹25 लाख – दिवालिया प्रक्रिया से जुड़े खर्च के लिए इस्तेमाल होंगे।

यानी करीब ₹22,006.57 करोड़ के दावों के मुकाबले लेनदारों को वास्तविक भुगतान लगभग ₹6.25 करोड़ ही मिलेगा।

NCLT ने इतनी बड़ी कटौती को मंजूरी क्यों दी?

लेनदारों ने योजना पर गंभीर आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि इतनी कम राशि में प्रस्तावित भुगतान व्यावहारिक और उचित नहीं है।

लेकिन NCLT ने योजना को मंजूरी देते हुए इस बात को महत्व दिया कि लेनदारों के बहुमत ने इसे स्वीकार किया था। योजना को लगभग 80.81% वोटिंग वैल्यू का समर्थन मिला था।

ट्रिब्यूनल के सामने यह भी तर्क रखा गया कि सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्तियों का मूल्य प्रस्तावित भुगतान से भी कम आंका गया था। ऐसे में योजना खारिज होने की स्थिति में लेनदारों को इससे भी कम वसूली होने की संभावना थी।

किन बड़े लेनदारों ने विरोध किया?

भुगतान योजना का विरोध करने वाले प्रमुख लेनदारों में LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank और RBL Bank जैसे संस्थान शामिल रहे।

LIC Housing Finance का स्वीकृत दावा करीब ₹1,322.39 करोड़ था। इसके मुकाबले प्रस्तावित भुगतान लगभग ₹38.09 लाख है—यानी उसके स्वीकृत दावे का करीब 0.028%

LIC Housing Finance और HDFC Bank अब इस फैसले को चुनौती देने की तैयारी में हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज

NCLT के फैसले के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह केवल ‘हेयरकट’ नहीं बल्कि ‘मुंडन’ है और इसे Insolvency and Bankruptcy Code की भावना पर सवाल उठाने वाला फैसला बताया।

उद्योगपति विजय माल्या ने भी सोशल मीडिया पर इस मामले पर प्रतिक्रिया दी और इसकी तुलना अपने मामले से की। उन्होंने सुभाष चंद्रा को बधाई देते हुए भारत की कर्ज समाधान व्यवस्था पर सवाल उठाया।

यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है?

इस मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया में लेनदारों के भारी नुकसान के बावजूद किसी भुगतान योजना को मंजूरी दी जा सकती है?

NCLT के आदेश ने एक तरफ बहुमत वाले लेनदारों के व्यावसायिक निर्णय को महत्व दिया है, वहीं दूसरी तरफ करीब 99.97% के हेयरकट ने भारत की insolvency व्यवस्था में वसूली की प्रभावशीलता पर बहस छेड़ दी है।

हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि यह फैसला सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ी दिवालिया प्रक्रिया से संबंधित है। इससे मुख्य उधारकर्ता कंपनियों की सभी कॉर्पोरेट देनदारियां स्वतः समाप्त नहीं होतीं। LIC Housing Finance ने भी स्पष्ट किया है कि उसकी संबंधित सुरक्षा/मॉर्गेज के अधिकार इस व्यक्तिगत भुगतान योजना से प्रभावित नहीं होते।

अब आगे क्या होगा?

NCLT के फैसले के बाद असंतुष्ट लेनदारों के पास अपील का रास्ता खुला है। HDFC Bank और LIC Housing Finance NCLAT में इस आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

इसलिए फिलहाल यह मामला खत्म नहीं हुआ है। अगला महत्वपूर्ण पड़ाव National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) हो सकता है, जहां लेनदार NCLT के फैसले को चुनौती दे सकते हैं।

₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत दावों के मुकाबले ₹6.25 करोड़ की वास्तविक लेनदार वसूली, यानी करीब 0.03%। NCLT की मंजूरी के बाद यह मामला अब भारत की Insolvency व्यवस्था, Creditor Recovery और Personal Guarantees की प्रभावशीलता पर बड़ी बहस का विषय बन गया है।

Top News: Bilibili: चीन का YouTube जैसा प्लेटफॉर्म आखिर इतना लोकप्रिय क्यों है? – newsshot.in

Leave a Comment