क्या भारत में खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism) मुश्किल होने वाली है? क्या सरकार का नया Digital Personal Data Protection Act (DPDP Act) पत्रकारों की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार को प्रभावित कर सकता है?
देश के 21 बड़े डिजिटल मीडिया संस्थानों ने DPDP Act, 2023 और इससे जुड़े नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
दिलचस्प बात यह है कि इस याचिका में The Indian Express, The Hindu, India Today, Times Group, NDTV, Zee और Network18 जैसे बड़े मीडिया संस्थान शामिल हैं।
इस वीडियो में समझिए:
🔹 DPDP Act क्या है और सरकार ने इसे क्यों बनाया?
🔹 21 मीडिया संस्थानों को इस कानून से क्या आपत्ति है?
🔹 क्या पत्रकारों को खबर प्रकाशित करने के लिए संबंधित व्यक्ति की सहमति लेनी होगी?
🔹 क्या पत्रकारों के गोपनीय सूत्र (Whistleblowers) खतरे में हैं?
🔹 RTI Act में संशोधन का पत्रकारिता से क्या संबंध है?
🔹 क्या इस कानून से भ्रष्टाचार और सरकारी अनियमितताओं की जांच प्रभावित हो सकती है?
🔹 सुप्रीम कोर्ट में अब तक क्या हुआ और आगे क्या हो सकता है?
यह सिर्फ मीडिया संस्थानों की लड़ाई नहीं है। यह निजता के अधिकार (Right to Privacy), प्रेस की स्वतंत्रता (Press Freedom) और जनता के सूचना पाने के अधिकार (Right to Information) के बीच संतुलन का सवाल है।
आपकी राय क्या है?
क्या सरकार को नागरिकों की निजता की सुरक्षा के लिए पत्रकारिता पर भी डेटा संबंधी प्रतिबंध लगाने चाहिए? या खोजी पत्रकारिता के लिए कानून में विशेष छूट होनी चाहिए?
कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं।
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