7 दिन में हॉर्मुज खोलने का प्रस्ताव, अमेरिका की सख्ती से बढ़ी चिंता

NewsShot.in | 26 सितंबर 2026 | नई दिल्ली

ईरान ने 7 दिन में हॉर्मुज खोलने और बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। ट्रंप के रुख और मिडटर्म के बाद संभावित अमेरिकी कार्रवाई से बढ़ी चिंता।

अमेरिका और ईरान के बीच करीब सात महीने से जारी संघर्ष को रोकने की एक नई कूटनीतिक कोशिश को बड़ा झटका लगा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि ट्रंप ने अपने सहयोगियों से संकेत दिया है कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर अमेरिकी बमबारी फिर शुरू हो सकती है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका के सामने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सात दिन के भीतर फिर खोलने का प्रस्ताव रखा था। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने न्यूयॉर्क में कहा कि अगर अमेरिका कुछ शर्तें स्वीकार करता है तो सात दिन के अंत में हॉर्मुज खोल दिया जाएगा और दोनों देशों के बीच बातचीत फिर शुरू हो सकती है।

ईरान का 7-दिन का प्रस्ताव क्या है?

ईरान के प्रस्ताव में सात दिनों के लिए क्षेत्र में शत्रुता रोकने की बात है। इसके बदले तेहरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और परमाणु मुद्दे समेत व्यापक बातचीत शुरू करने को तैयार है।

ईरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में जमा करीब 12 अरब डॉलर की ईरानी संपत्तियों को जारी करना शामिल है। प्रस्ताव में लेबनान समेत मध्य पूर्व में संघर्ष रोकने की शर्त भी बताई गई है।

अरागची के मुताबिक, ये मांगें पूरी तरह नई नहीं हैं। उनका कहना है कि तेहरान पहले हुए इस्लामाबाद समझौते में तय शर्तों के आधार पर आगे बढ़ना चाहता है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी सहमति मिलने के बाद सात दिन की अवधि शुरू होगी और सातवें दिन हॉर्मुज फिर खोला जा सकता है।

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जून का समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?

इस नए प्रस्ताव की पृष्ठभूमि में जून में हुआ इस्लामाबाद समझौता भी है। उस समझौते का उद्देश्य युद्ध को रोकना, हॉर्मुज में समुद्री यातायात बहाल करना और आगे की बातचीत का रास्ता खोलना था। लेकिन बाद में दोनों पक्षों के बीच शर्तों और हॉर्मुज की स्थिति को लेकर मतभेद बढ़ गए और समझौते का ढांचा कमजोर पड़ गया।

अब ईरान उसी कूटनीतिक ढांचे को छोटे समय-फ्रेम में दोबारा लागू करने की कोशिश कर रहा है।

ट्रंप का रुख क्या है?

ट्रंप ने हाल के दिनों में ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प खुला रखा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में उन्होंने ईरान के साथ समझौते की संभावना का जिक्र किया था, लेकिन साथ ही तेहरान पर कड़ा दबाव बनाए रखा। उन्होंने यह भी कहा था कि मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के साथ समझौते की संभावना हो सकती है।

इसी पृष्ठभूमि में WSJ की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि ट्रंप ईरान पर हमले फिर शुरू करने की उम्मीद रखते हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई निश्चित सैन्य कार्रवाई की तारीख घोषित हो चुकी है। फिलहाल सैन्य और कूटनीतिक दोनों विकल्प चर्चा में हैं।

7 दिन में हॉर्मुज खोलने का प्रस्ताव, अमेरिका की सख्ती से बढ़ी चिंता
7 दिन में हॉर्मुज खोलने का प्रस्ताव, अमेरिका की सख्ती से बढ़ी चिंता

हॉर्मुज क्यों है पूरी दुनिया के लिए अहम?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। मौजूदा संघर्ष के दौरान यहां से जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। Reuters के अनुसार 19-20 सितंबर के सप्ताहांत में केवल 17 कमोडिटी जहाज हॉर्मुज से गुजरे, जबकि उससे पहले यह संख्या 37 थी और युद्ध से पहले औसतन करीब 125 जहाज रोजाना इस मार्ग से गुजरते थे।

इसका सीधा असर तेल, गैस, बीमा और समुद्री माल ढुलाई की लागत पर पड़ रहा है। Reuters के मुताबिक वैकल्पिक शिपिंग और जहाज से जहाज तेल ट्रांसफर जैसी व्यवस्थाओं ने कुछ आपूर्ति बनाए रखी है, लेकिन इनकी लागत काफी अधिक है।

भारत के लिए क्या मायने?

भारत के लिए यह संकट खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि मध्य पूर्व ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार का प्रमुख क्षेत्र है। हॉर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान से कच्चे तेल और गैस की कीमतों, शिपिंग लागत और भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है।

अब असली सवाल यह है कि क्या अमेरिका और ईरान किसी नए समझौते तक पहुंच पाएंगे या नवंबर के मिडटर्म चुनावों के बाद संघर्ष फिर तेज होगा। फिलहाल ईरान का सात-दिन का प्रस्ताव मेज पर है, लेकिन ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रिया और हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही अगले कुछ दिनों में सबसे महत्वपूर्ण संकेत होंगे।

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